तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समझा,
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समझा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही।
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समझा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही।
ख़ामोशी का मतलब लिहाज़ भी होता है ..लोग इसे कमजोरी समझ लेते है !
रस्म-ए-मोहब्बत सिर्फ हमने निभाया है..वो जब भी जाने को थे हमने बुलाया है..!!बदसूरत तो नहीं थी बद सिरत थी वो..दिल-ए-दरवेश में अब गमों का साया हैउल्फत का सिला उसने दिया था मुझे,हाँ, खूबसूरत चेहरे से एहतियात बताया है..!
वो कहती रही … तुम मेरे हो..मैं सुनना चाहता था .. मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ
हादसा ज़िंदगी है आदमी की…साथ देगी भला ख़ुशी कब तक…!!
प्यार ढूंढते हो… तो किताबों में ढूंढो…जिन्दगी में तो सिर्फ़… ग़म मिलते हैं…!!
आओ खुद की बात करें…दुनिया में रखा क्या है…!!
बुरा नहीं था मैं…बस साबित नहीं कर पाया…!!
इंसान बड़ी अजीब फितरत का मालिक है…ये मरे हुये को रोता है… और जिंदो को रुलाता है…!!
हम वफ़ा के मामले मे दरख़्त की तरह हैं…कट जाते हैं… लेकिन जगह नहीं बदलते…!!