Sad Shayari

रस्म-ए-मोहब्बत सिर्फ हमने निभाया है..

रस्म-ए-मोहब्बत सिर्फ हमने निभाया है..वो जब भी जाने को थे हमने बुलाया है..!!बदसूरत तो नहीं थी बद सिरत थी वो..दिल-ए-दरवेश में अब गमों का साया हैउल्फत का सिला उसने दिया था मुझे,हाँ, खूबसूरत चेहरे से एहतियात बताया है..!