मतलबी दुनिया के लोग खड़े थे, हाथों में पत्थर लेकर…

मतलबी दुनिया के लोग खड़े थे, हाथों में पत्थर लेकर…
मैं कहां तक भागता, शीशे का मुकद्दर लेकर…

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